ॐ नीलांजन-समाभासं रविपुत्रं यमा-ग्रजम्।
छाया-मार्तण्ड-सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम् ।।
शनि देव इस कलियुग में सबसे प्रभावशाली देवता हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों में शनि ग्रह का व्यक्ति के जीवन पर सबसे अधिक प्रभाव होता है। शनि की महादशा, अंतर दशा साढ़े साती और ढाईया मनुष्य जीवन में अनेक दुःखों और विपत्तियों को न्यौता देती है। संसार में शनिदेव की दृष्टि के कारण राजाओं को रंक बनते भी देखा गया है।
आगामी 14 अप्रैल 2014 सुबह 06 बजकर 40 मिनट पर सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे । ज्योतिषी गणना के अनुसार ये इस वर्ष की पहली सक्रांति कहलाई जाएगी तथा सूर्य का मेष राशि में प्रवेश मेष सक्रांति कहलाती है।
महत्वपूर्ण ग्रह स्तिथि: इस मेष सक्रांति को पिता सूर्यदेव और पुत्र शनिदेव होंगे आमने सामने। शनिदेव पूर्व से ही अपनी उच्च राशि तुला तथा देव गुरु के नक्षत्र विशाखा में विद्धमान हैं। सूर्य देव भी अपनी उच्च राशि में मेष में प्रवेश करेंगे तथा अपने मूल त्रिकोण अश्वनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस सक्रांति को सूर्य छाया ग्रह केतु के साथ युति करेंगे तथा शनि पूर्व से ही राहू के साथ युति कर पितृ दोष को जन्म दे रहे हैं।
पितृ दोष निवारण: ज्योतिष शस्त्र के अनुसार ग्रह स्थिति पितृ दोष निवारण के लिए अनुकूल बनी हुई है। ये ग्रह स्थिति अनेक वर्षों में एक बार ही बनती है। ज्योतिष के पारस्परिक मैत्री चक्र के अनुसार ये स्थिति युद्ध को भी संबोधित करती है जो पिता और पुत्र, ज्ञान और अंधकार तथा धर्म और अधर्म के बीच युद्ध को संबोधित करती है।
कैरियर में सफलता के योग: पौराणिक शस्त्र अनुसार सूर्य पुत्र शनि कर्म प्रधान न्यायाधीश कहलाए गए हैं। कालपुरुष सिद्धांत के अनुसार शनि व्यक्ति की कुण्डली के कर्म क्षेत्र और लाभ क्षेत्र पर अधिपत्य रखते हैं, किसी भी व्यक्ति की कुण्डली का दसवां भाव पितृ और कर्म भाव कहलाता है तथा व्यक्ति की कुण्डली का ग्यारवां भाव लाभ और आय क्षेत्र कहलाया जाता है। कालपुरुष सिद्धांत के अनुसार सूर्य देव को ज्ञान और प्रकाश का देवता कहा गया है तथा सूर्यदेव व्यक्ति की कुण्डली के पांचवे भाव पर अपना अधिपत्य रखते हैं जो के ज्ञान और संतान का भाव है। मेष सक्रांति पर पड़ने वाली ग्रह स्थिति कॅरियर में सफलता प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
ग्रह बाधा निवारण: आगामी आने वाले सभी शनिवार शनि और राहू ग्रह की बाधा के निवारण के लिए श्रेष्ठ हैं। ऐसे व्यक्ति जिनकी कुण्डली में शनि की महादशा, अंतर दशा साढ़े साती और ढाईया चल रहा है अथवा राहू की महादशा या अंतर दशा चल रही है उनके लिए आने वाले दिनों में अपनी समस्याओं के निवारण और उपाय करने के लिए श्रेष्ठ योग हैं।
शनि देव की शांति के उपाय:
1. पीपल के पेड़ पर चाशनी चढ़ाएं।
2. शनि देव की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं।
3. शनि मंदिर में काले तिल, काले कपड़े और तेल का दान करें।
4. किसी बूढ़े व्यक्ति को काला छाता दान करें।
5. किसी मेहनतकश मजदूर को चमड़े के काले जूते दान करें।
पितृ दोष के उपाय:
1. शनैश्चर नमस्तुभ्यं नमस्ते त्वथ राहवे।
केतवेअथ नमस्तुभ्यं सर्वशांतिप्रदो भव॥
इस मंत्र से काले रंग के शिवलिंग पर सरसों का तेल चढ़ाएं।
2. बरगद के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
3. किसी देवी मंदिर में जाकर 10 कन्याओं को हलवा पूड़ी खिलाएं।
4. शनिवार के शनिवार बहते पानी में नारियल बहाएं
5. शनिवार के दिन स्टील के बर्तन दान करें।
छाया-मार्तण्ड-सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम् ।।
शनि देव इस कलियुग में सबसे प्रभावशाली देवता हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों में शनि ग्रह का व्यक्ति के जीवन पर सबसे अधिक प्रभाव होता है। शनि की महादशा, अंतर दशा साढ़े साती और ढाईया मनुष्य जीवन में अनेक दुःखों और विपत्तियों को न्यौता देती है। संसार में शनिदेव की दृष्टि के कारण राजाओं को रंक बनते भी देखा गया है।
आगामी 14 अप्रैल 2014 सुबह 06 बजकर 40 मिनट पर सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे । ज्योतिषी गणना के अनुसार ये इस वर्ष की पहली सक्रांति कहलाई जाएगी तथा सूर्य का मेष राशि में प्रवेश मेष सक्रांति कहलाती है।
महत्वपूर्ण ग्रह स्तिथि: इस मेष सक्रांति को पिता सूर्यदेव और पुत्र शनिदेव होंगे आमने सामने। शनिदेव पूर्व से ही अपनी उच्च राशि तुला तथा देव गुरु के नक्षत्र विशाखा में विद्धमान हैं। सूर्य देव भी अपनी उच्च राशि में मेष में प्रवेश करेंगे तथा अपने मूल त्रिकोण अश्वनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस सक्रांति को सूर्य छाया ग्रह केतु के साथ युति करेंगे तथा शनि पूर्व से ही राहू के साथ युति कर पितृ दोष को जन्म दे रहे हैं।
पितृ दोष निवारण: ज्योतिष शस्त्र के अनुसार ग्रह स्थिति पितृ दोष निवारण के लिए अनुकूल बनी हुई है। ये ग्रह स्थिति अनेक वर्षों में एक बार ही बनती है। ज्योतिष के पारस्परिक मैत्री चक्र के अनुसार ये स्थिति युद्ध को भी संबोधित करती है जो पिता और पुत्र, ज्ञान और अंधकार तथा धर्म और अधर्म के बीच युद्ध को संबोधित करती है।
कैरियर में सफलता के योग: पौराणिक शस्त्र अनुसार सूर्य पुत्र शनि कर्म प्रधान न्यायाधीश कहलाए गए हैं। कालपुरुष सिद्धांत के अनुसार शनि व्यक्ति की कुण्डली के कर्म क्षेत्र और लाभ क्षेत्र पर अधिपत्य रखते हैं, किसी भी व्यक्ति की कुण्डली का दसवां भाव पितृ और कर्म भाव कहलाता है तथा व्यक्ति की कुण्डली का ग्यारवां भाव लाभ और आय क्षेत्र कहलाया जाता है। कालपुरुष सिद्धांत के अनुसार सूर्य देव को ज्ञान और प्रकाश का देवता कहा गया है तथा सूर्यदेव व्यक्ति की कुण्डली के पांचवे भाव पर अपना अधिपत्य रखते हैं जो के ज्ञान और संतान का भाव है। मेष सक्रांति पर पड़ने वाली ग्रह स्थिति कॅरियर में सफलता प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
ग्रह बाधा निवारण: आगामी आने वाले सभी शनिवार शनि और राहू ग्रह की बाधा के निवारण के लिए श्रेष्ठ हैं। ऐसे व्यक्ति जिनकी कुण्डली में शनि की महादशा, अंतर दशा साढ़े साती और ढाईया चल रहा है अथवा राहू की महादशा या अंतर दशा चल रही है उनके लिए आने वाले दिनों में अपनी समस्याओं के निवारण और उपाय करने के लिए श्रेष्ठ योग हैं।
शनि देव की शांति के उपाय:
1. पीपल के पेड़ पर चाशनी चढ़ाएं।
2. शनि देव की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं।
3. शनि मंदिर में काले तिल, काले कपड़े और तेल का दान करें।
4. किसी बूढ़े व्यक्ति को काला छाता दान करें।
5. किसी मेहनतकश मजदूर को चमड़े के काले जूते दान करें।
पितृ दोष के उपाय:
1. शनैश्चर नमस्तुभ्यं नमस्ते त्वथ राहवे।
केतवेअथ नमस्तुभ्यं सर्वशांतिप्रदो भव॥
इस मंत्र से काले रंग के शिवलिंग पर सरसों का तेल चढ़ाएं।
2. बरगद के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
3. किसी देवी मंदिर में जाकर 10 कन्याओं को हलवा पूड़ी खिलाएं।
4. शनिवार के शनिवार बहते पानी में नारियल बहाएं
5. शनिवार के दिन स्टील के बर्तन दान करें।