जीवन में कामयाबी चाहते हैं तो इस ऑफर को अपनाएं

जीवन में ऐसा काम करो, जिसमें रुचि और ज्ञान हो क्योंकि वही आपका धर्म है। बिना रुचि और ज्ञान के किया हुआ काम आपको आगे नहीं ले जा सकता। मिसाल के तौर पर बिजनेस में रुचि रखने वाला अगर नौकरी करे और नौकरी की रुचि वाला बिजनेस करे तो सफलता नहीं मिलेगी। जिसका जो धर्म है, उसी के हिसाब से काम को चुनें।

दोस्त इंजीनियरिंग कर रहे थे तो पहले वह कर ली, बाद में देखा-देखी वकालत कर ली और उसके बाद एम.बी.ए. किया। सफलता कहीं नहीं मिली क्योंकि रुचि कहीं भी नहीं थी। हुआ यह कि आखिर में पिता की दुकान पर ही बैठे। अपनी रुचि को न देखते हुए जो दूसरों के कहने से चलते हैं, परेशान ही रहते हैं।

विदुर जब धृतराष्ट्र का महल छोड़कर झोंपड़ी में रहने लगे तो आनंद में आ गए। यह कुछ ऐसा ही है, जैसे पांच सितारा होटल में काम करने वाले को नींद अपने छोटे घर में ही आएगी क्योंकि दूसरे के पकवान में वह मजा नहीं, जो अपनी सूखी रोटी में है। अध्यात्म में अपने धर्म का मतलब अपनी आत्मा से है और दूसरे का धर्म यानी आत्मा के अलावा जो भी सांसारिक है। इसलिए भला अपने धर्म के पालन में ही है, दूसरे का धर्म तो भय देता है क्योंकि केवल आत्मा ही निर्भय है, बाकी सब भय से घिरे हुए हैं।

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