देश में बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में किसी भी क्षेत्र में रोजगार पाना अपने-आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि ही है। ज्यादातर देखा गया है कि कुछ खास क्षेत्रों की नौकरियों में आवश्यकता से ज्यादा ही भीड़ हो जाती है जिसका एक कारण हमारी शिक्षा पद्धति भी है। इस भीड़ से बचने के लिए आपका शुरू से ही सचेत रहना होगा मसलन जिन्होंने संस्कृत में भूषण की डिग्री अरबी में मौलवी, आलम या उर्दू में अदीब आलम आदि में शिक्षा ली है, उनकी सेना में धर्म शिक्षक के रूप में नियुक्ति हो सकती है।
वैसे वर्तमान शिक्षा में माहौल में धार्मिक विषयों में डिग्री लेने वाले को पुराने विचारधाराओंं का माना जाता है। परंतु आपके द्वारा प्राप्त सफलता उन तमान आलोचकों की बोलती बंद कर देगी। वैसे उम्मीदवार जिन्होंने मौलवी, पादरी, पंडित आदि को डिग्री ले रखी है सेना में धर्म शिक्षक के रूप में जूनियर कमीशन अफसर बनकर अपना भविष्य संवार सकते हैं।
सेना में धर्म शिक्षक के रूप में जूनियर कमीशन अफसर के लिए समय-समय पर आवेदन पत्र मांगे जाते हैं। मुख्य रूप से सेवा में धर्म शिक्षक का काम धार्मिंक ग्रंथों का प्रचार करना है एवं विभिन्न रेजीमेंंटल यूनिटों की धार्मिक संस्थानों में विभिन्न अनुष्ठïान कराते हैं। उनके कार्यों में अफसरों, सैनिकों और उनके परिवार को धार्मिक प्रवचन करने और उनके कल्याण हेतु धार्मिक पाठ करना शामिल है। इतना ही नहीं मृतक का अंतिम संस्कार करवाना, अस्पतालों में रोगियों को धार्मिक उपदेश देना, दंड भुगत रहे सैनिकों को उपदेश देना, स्वास्थ्य लाभ कर रहे रोगियों से धर्मग्रंथों का पाठ करना, बच्चों और भर्ती किये गये किशोरों को विशेष धार्मिक शिक्षाएं देना।
उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता के रूप में किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक होना चाहिए तथा धर्म के अनुकूल निम्रलिखित योग्यता भी होनी चाहिए।
मौलवी के लिए अरबी में मौलवी आलिम या उर्दू में आदिब आलिम या संबंद्ध क्षेत्रीय भाषा में समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण की हो। वैसे उम्मीदवार को बी.एस. परीक्षा में एच्छिक (मुख्य) विषय के रूप में अरबी/उर्दू ली हो परंतु अरबी आलिम या उर्दू में आदीब आलिम की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं किया हो आवेदन के पात्र है।
पंडित हेतु संस्कृत में मध्यम या हिन्दी में भूषण परीक्षा अथवा संबद्ध क्षेत्रीय भाषा में कोई समकक्ष परीक्षा पास की हो। वैसे उम्मीदवार जिन्होंने बी.ए. परीक्षा ऐच्छिक (मुख्य) विषय के रूप में संस्कृत/हिंदी लेकर पास की हो, आवेदन केे पात्र हैं।
पादरी के लिए उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता के रूप में गिरजाघर के सक्षम पदाधिकारियों से विधिवत पादरी की दीक्षा ली हो और उनका अब भी स्थानीय विष्य की स्वीकृति सूची में हो।
बौद्ध भिक्षु हेतु सक्षम पदाधिकारियों से विधिवत बौद्ध भिक्षु की दीक्षा प्राप्त की हो, इस पद के लिए आवेदन के पात्र हैं।
ग्रंथी हेतु पंजाबी की विद्वान परीक्षा अथवा अपनी संबंद्ध क्षेत्रीइय भाषा में कोई समकक्ष परीक्षा पास की हो, जिन उम्मीदवारों ने बी.ए. परीक्षा ऐच्छिक (मुख्य) के रूप में पंजाबी की हो परंतु पंजाबी की विद्वान परीक्षा पास न की हो वह भी आवेदन दे सकते हैं।
ग्रंथी हेतु पंजाबी को विद्वान परीक्षा अथवा अपनी संबंद्ध क्षेत्रीय भाषा में कोई समकक्ष परीक्षा पास की हो, जिन उम्मीदवारों ने बी.ए. परीक्षा ऐच्छिक (मुख्य) के रूप में पंजाबी की हो परंतु पंजाबी की विद्वान परीक्षा पास न की हो वह भी आवेदन दे सकते हैं।
उम्मीदवार की शारीरिक स्वास्थ्य मापदंड हेतु डॉक्टरी जांच में उपयुक्त होना चाहिये तथा इसमें कोई वैसा खामियां नहीं होनी चाहिए जिससे उसे विश्व के किसी भाग में अपने धार्मिक कार्य में बाधा उत्पन्न न हो।
चयन प्रक्रिया : योग्य उम्मीदवारों को जेड.आर.जो प्रांरभिक जांच-पड़ताल के लिए बुलाएंगे तथा जांच-पड़ताल में शैक्षिक योग्यता के मूल प्रमाण-पत्र देखे जाएंगे और डाक्टरी जांच परीक्षा ली जाएगी। इसमें उत्तीर्ण उममीदवारों को लिखित परीक्षा ली जाएगी जिसमें दो प्रश्र पत्र होंगे।
दो सौ पचास अंकों की प्रथम पत्र में दो भाग होंगे। पहले भाग में सामन्य ज्ञान की परीक्षा ली जाएगी तथा दूसरे भाग में उम्मीदवार की भाववृर्ति की जांच होगी। यह सभी धर्मों के उम्मीदवारों के लिए आवश्यक है। जबकि दो सौ पचास अंकों के दूसरे प्रश्र पत्र में उसके धर्म के ज्ञान की परीक्षा ली जाएगी। प्रश्र का उत्तर आप हिंदी या अंग्रेजी किसी एक में दे सकते हैं।
उपर्युक्त परीक्षा में सफी उम्मीदवारों से साक्षात्कार लिया जाता है। तद्ïपश्चात सफल उम्मीदवारों को रेजीमेंंटल केंद्रों में आथ सप्ताह का प्रशिक्षण संस्थान पुणे में आथ सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अंतिम रूप से उम्मीदवार का चुनाव अफसरो के एक बोर्ड द्वारा किया जाएगा और सफी उम्मीदवार को जूनियर कमीश्र अफसर (धर्म शिक्षक) के रूप में नियुक्त कर लिया जाएगा