शुरूआती तनख्वाह : 20 से 30 हजार रुपए प्रतिमाह
छात्रों के लिए इस विषय में क्या है?
भारत की 5000 वर्ष पुरानी विरासत के बारे में बढ़ रही जागरूकता से नए शैक्षिक विकल्प उत्पन्न हो रहे हैं जो स्टडी ऑफ म्यूजियम पर आधारित हैं। पिछले एक दशक के दौरान म्यूजियोलॉजी में विशेषज्ञता काफी लोकप्रिय हो गई है और यह कोर्स करवाने वाले अनेक संस्थान खुल चुके हैं।
हाल के सालों में अनेक व्यवसायी भी कला दीर्घाओं में काफी निवेश कर रहे हैं। नई इंफर्मेशन टैक्नोलॉजी के साधनों ने भी देश की विरासत के अध्ययन की बढ़ती लोकप्रियता में इजाफा किया है। म्यूजियोलॉजी का अध्ययन सर्वप्रथम महाराजा सया जी राव यूनिवर्सिटी वडोदरा में 1952 में शुरू किया गया था।
विशेषज्ञों की राय
पिछले एक दशक के दौरान हमारे देश की सांस्कृतिक विरासत में संग्रहालयों द्वारा दिए गए योगदान को लेकर लोगों में जागरूकता का स्तर काफी बढ़ गया है। आज म्यूजियोलॉजी को एक महत्वपूर्ण शैक्षिक विषय समझा जा रहा है। इसमें स्कूल तथा कालेज भी अपने छात्रों को विशेष गतिविधियों से शामिल कर रहे हैं।
रोजगार की संभावनाएं
देश की विरासत को जनता के करीब लाना ही संग्रहालयों का असली मकसद होता है। अब संग्रहालयों को नई नजर से देखा जाने लगा है तथा इनमें काफी बदलाव भी आया है। आज संग्रहालयों को सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में देखा जाता है जो समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
इतना ही नहीं अब नए तरह के संग्रहालय भी खुल रहे हैं जैसे कि पंचायती राज म्यूजियम, कम्युनिटी म्यूजियम के अलावा निजी स्तर पर भी कई तरह के संग्रहालय खोले जा रहे हैं। इन सभी संग्रहालयों में सक्षम पेशेवरों की जरूरत है। म्यूजियम स्टडीज में डिग्री हासिल करने के बाद छात्र चाहे तो कंजर्वेशन तथा हैरीटेज डाक्यूमैंटेशन के लिए अपना स्टूडियो भी स्थापित कर सकते हैं। वे क्यूरेटर, एजुकेटर, डिजाइनर, एक्टिविस्ट तथा आर्ट हिस्ट्री एक्सपर्ट के तौर पर दुनिया भर के संग्रहालयों तथा कला दीर्घाओं में कार्य कर सकते हैं।
प्रमुख नियोक्ता
राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली, इंडियन म्यूजियम कोलकाता, सफदरजंग म्यूजियम हैदराबाद, विभिन्न राज्यों के संग्रहालयों तथा न्यूमिसमैटिक सोसायटीज
प्रमुख संस्थान
नैशनल म्यूजियम इंस्टीच्यूट (एम.ए. हिस्ट्री ऑफ आर्टस, एम.ए. कंजर्वेशन, एम.ए. म्यूजियोलॉजी)
महाराजा सयाजी राव यूनिवर्सिटी वडोदरा (पी.जी.डिप्लोमा इन पेंटिंग, स्कल्प्चर, अप्लाइड आर्टस)
छात्रों के लिए इस विषय में क्या है?
भारत की 5000 वर्ष पुरानी विरासत के बारे में बढ़ रही जागरूकता से नए शैक्षिक विकल्प उत्पन्न हो रहे हैं जो स्टडी ऑफ म्यूजियम पर आधारित हैं। पिछले एक दशक के दौरान म्यूजियोलॉजी में विशेषज्ञता काफी लोकप्रिय हो गई है और यह कोर्स करवाने वाले अनेक संस्थान खुल चुके हैं।
हाल के सालों में अनेक व्यवसायी भी कला दीर्घाओं में काफी निवेश कर रहे हैं। नई इंफर्मेशन टैक्नोलॉजी के साधनों ने भी देश की विरासत के अध्ययन की बढ़ती लोकप्रियता में इजाफा किया है। म्यूजियोलॉजी का अध्ययन सर्वप्रथम महाराजा सया जी राव यूनिवर्सिटी वडोदरा में 1952 में शुरू किया गया था।
विशेषज्ञों की राय
पिछले एक दशक के दौरान हमारे देश की सांस्कृतिक विरासत में संग्रहालयों द्वारा दिए गए योगदान को लेकर लोगों में जागरूकता का स्तर काफी बढ़ गया है। आज म्यूजियोलॉजी को एक महत्वपूर्ण शैक्षिक विषय समझा जा रहा है। इसमें स्कूल तथा कालेज भी अपने छात्रों को विशेष गतिविधियों से शामिल कर रहे हैं।
रोजगार की संभावनाएं
देश की विरासत को जनता के करीब लाना ही संग्रहालयों का असली मकसद होता है। अब संग्रहालयों को नई नजर से देखा जाने लगा है तथा इनमें काफी बदलाव भी आया है। आज संग्रहालयों को सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में देखा जाता है जो समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
इतना ही नहीं अब नए तरह के संग्रहालय भी खुल रहे हैं जैसे कि पंचायती राज म्यूजियम, कम्युनिटी म्यूजियम के अलावा निजी स्तर पर भी कई तरह के संग्रहालय खोले जा रहे हैं। इन सभी संग्रहालयों में सक्षम पेशेवरों की जरूरत है। म्यूजियम स्टडीज में डिग्री हासिल करने के बाद छात्र चाहे तो कंजर्वेशन तथा हैरीटेज डाक्यूमैंटेशन के लिए अपना स्टूडियो भी स्थापित कर सकते हैं। वे क्यूरेटर, एजुकेटर, डिजाइनर, एक्टिविस्ट तथा आर्ट हिस्ट्री एक्सपर्ट के तौर पर दुनिया भर के संग्रहालयों तथा कला दीर्घाओं में कार्य कर सकते हैं।
प्रमुख नियोक्ता
राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली, इंडियन म्यूजियम कोलकाता, सफदरजंग म्यूजियम हैदराबाद, विभिन्न राज्यों के संग्रहालयों तथा न्यूमिसमैटिक सोसायटीज
प्रमुख संस्थान
नैशनल म्यूजियम इंस्टीच्यूट (एम.ए. हिस्ट्री ऑफ आर्टस, एम.ए. कंजर्वेशन, एम.ए. म्यूजियोलॉजी)
महाराजा सयाजी राव यूनिवर्सिटी वडोदरा (पी.जी.डिप्लोमा इन पेंटिंग, स्कल्प्चर, अप्लाइड आर्टस)
