बुजुर्गों की सेवा में बनाइए अच्छा कॅरियर


अगर आप सेवा के जुड़े क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहते हैं और साथ में अच्छी कमाई भी करना चाहते हैं कि जेरियाट्रिक्स केयर बन अपनी चाहत पूरी कर सकते हैं। इस पाठ्यक्रम का संचालन भारत सरकार का सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय करता है। इसका मकसद युवक−युवतियों को बुजर्गों की सेवा के लिए प्रशिक्षित करना है। पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं बढ़ी हैं।
दरअसल बुजर्गों की सेवा के लिए इस क्षेत्र में दक्ष लोगों की जरूरत को काफी पहले से महसूस किया जा रहा था। इस जरूरत को ध्यान में रखकर सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार ने जेरियाट्रिक्स केयर पाठ्यक्रम की शुरुआत की जिसके तहत बुजुर्गों से जुड़ी समस्याओं के बारे में बताया जाता है।
इस पाठ्यक्रम में मूल रूप से विद्यार्थियों को समुदाय के अंदर वृद्ध लोगों की स्थित, एकिल और संयुक्त परिवारों के गुण−दोष, सामाजिक सुरक्षा संबंधी उपाय, वृद्धावस्था में मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक स्थित किो समझने, पुनर्वास के अलावा उनकी समस्याओं को निपटाना, उनकी पोषाहार संबंधी जरूरतों की जानकारी और आहार प्रबंधन और मनोविज्ञान के अलावा वृद्धावस्था संबंधी देखभाल के आधारभूत सिद्धांतों की जानकारी दी जाती है। इस पाठ्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को घर−घर जाकर वृद्धों की समस्याओं पर रिपोर्ट भी तैयार करनी होती है।
पाठ्यक्रम−
बुजुर्गों की देखभाल संबंधी प्रमुख तौर पर तीन कोर्स चलाये जाते हैं। जिसमें तीन महीने और 6 महीने का प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम और पीजी डिप्लोमा कोर्स शामिल है। तीन माह का कोर्स खासतौर से समाजसेवी संस्थाओं के लिए है जो देश में बुजुर्गों की देखभाल और उनके लिए कार्य करती हैं। पीजी डिप्लोमा कोर्स का मुख्य उद्देश्य समर्पित व्यक्तियों की एक टीम तैयार करना होता है। पीजी डिप्लोमा कोर्स में इस क्षेत्र से संबंधित गहन अध्ययन कराया जाता है जिसमें थ्योरी स्तर प्रैक्टिकल और परियोजना कार्य के अलावा इंटर्निशप और सेमिनार प्रस्तुति भी सिखाई जाती है।
इन सभी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए अभ्र्यथी को प्रवेश परीक्षा देना पड़ती है। पीजी डिप्लोमा कोर्स में नामांकन के लिए उम्मीदावार को किसी भी संस्थान से समाज विज्ञान, समाज कार्य, मानव विज्ञान, परिचर्चा या गृहविज्ञान में स्नातक होना आवश्यक है। साथ ही अभ्यर्थी की उम्र किसी भी हालत में 20 साल से कम नहीं होनी चाहिए। वहीं वृद्धावस्था देखभाल संगठनों में कार्यरत या वृद्धावस्था सेवा क्षेत्र में प्रमाणपत्र प्राप्त उम्मीदवारों, सामाजिक कार्यकर्ता, काउंसलर, स्वास्थ्य कर्मी और नर्सिग के क्षेत्र में कार्यरत लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। जबकि 3 और 6 महीने के प्रमाणपत्र कोर्स के लिए उम्मीदवार का मैटि्रक पास होना आवश्यक है साथ ही उसकी आयु 18 साल से कम नहीं होना चाहिए। प्रवेश परीक्षा में सफल अभ्यर्थी को साक्षात्कार से भी गुजरना पड़ता है।
इस क्षेत्र में हाल के दिनों में अपार संभावनाएं उभरी हैं। पीजी डिप्लोमाधारी अभ्यर्थी किसी सरकारी, गैर सरकारी, कॉरपोरेट क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थाओं में अच्छे पद पर कार्य कर सकता है। इसके अलावा गृह देखभाल कर्ता, उपचार सहायक, शारीरिक चिकित्सा सहायक, परियोजना निदेशक, कार्यक्रम अधिकारी, कल्याण अधिकारी बनकर भविष्य संवार सकते हैं। इस कोर्स में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थी को ज्यादा जानकारी निम्न संस्थानों से मिल सकती है−
− डॉ. रेड्डी हैरिटेज फाउंडेशन, हैदराबाद।
− कलकत्ता मैट्रोपोलिटेन इंस्टीट्यूट ऑफ जिरानहोलॉजी, कोलकाता।
− न्यू इंटिग्रेटेड रूरल मैनेजमेंट एजेंसी, इम्फाल।
− राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान, आरके पुरम, नई दिल्ली।

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