आजादी का जश्न मनाती हैं स्कूटी पर सवार युवतियां






आज से तीन दशक पहले कोई अकेली लड़की बस में सवार होती थी तो लोग उसे घूर-घूर कर देखने लगते थे, आज बगल से स्कूटी पर सवार लड़की निकल जाती हैं, तो कोई नोटिस नहीं लेता। समय के एक बड़े अंतराल में यह एक बड़ा बदलाव हैं। पहले युवतियां घर की चौखट भी पार नहीं करती थीं, आज वे ट्रेन-बस में यात्रा कर रही हैं। खुद कार चला रही हैं। बरसों तक यातायात के सबसे सुगम साधन मोटर साइकिल और स्कूटर पर पुरुषों के वर्चस्व को भी युवतियों ने तोड़ दिया है। बीत दो-तीन सालों से कार या स्कूटर रैली में शामिल हो रही युवतियों ने जता दिया है कि वे भी किसी से कम नहीं, उन्हें भी स्कूटर और साइकिल चलाना आता है।
पिछले दिनों युवतियों में आत्मविश्वास और बराबरी का अहसास कराने के लिए पुरुषों की तरह एक बाइक रैली आयोजित की गई। लड़कियों ने ही नहीं युवतियों ने भी पूरे जोश और उत्साह से इसमें हिस्सा लिया। दरअसल युवतियों का स्कूटर और मोटरसाइकिल के प्रति क्रेज बढ़ गया हैं। वहीं बाइक और स्कूटर में हो रहे नित नए बदलाव ने न सिर्फ युवा वर्ग बल्कि युवतियां को भी अपनी तरफ आकर्षित किया हैं। बाइक या स्कूटी पर सवार युवती आत्मविश्वास से भरपूर दिखती है। इससे उन्हें आजादी की अहसास होता है।
यों युवतियों का बाइक के प्रति क्रेज काफी पुराना है। हां, यह जरूर हैं कि पहले जहां इक्का-दुक्का युवतियां ही स्कूटर या मोटरसाइकिल चलाती दिखती थीं अब यह संख्या काफी बढ़ गई है। न सिर्फ स्कूटी बल्कि बुलेट और हार्ली जैसी मजबूत और भारी बाइक भी पर युवतियां हाथ आजमा रही है। 25 साल की पूजा को बचपन से बाइक का बेहद शौक था। अपने पापा को देख कर उसमें भी बाइक चलाने की इच्छा हुई। जब वह बड़ी हुई तो उसने पापा की मोटरसाइकिल चलानी शुरू की। अब आए दिन वह बाइक रैली में हिस्सा लेती रहती हैं।
अब तो युवतियां स्कूटर की दीवानी हो चुकी है। देश के कई हिस्सों में आयोजित बाइक रैली में ये बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने लगी हैं। युवतियां अब न सिर्फ आर्थिक तौर पर बल्कि सामाजिक तौर पर भी बदल रही हैं। उनकी स्थिति पहले से बेहतर हो रही है। छोटे या बड़े कोई भी काम हो, वह अपनी स्कूटी से निपटा आती हैं। घर की छोटी-मोटी जरूरतें सब मिनटों में निपट जाता है।
ऐसा नहीं हैं कि स्कूटी चलाने की शौकीन युवतियां घर-परिवार की जिम्मेदारी भूल गई है बल्कि अब वे और मजबूती से अपने परिवार से जुड़ी हैं। वो दिन गए जब उन्हें 'बेचारी' को दर्जा दिया जाता था। घर की दहलीज पार करने पर हंगामा कर दिया जाता था। मगर अब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। वे हर क्षेत्र में अपना कौशल दिखा रही हैं और जिंदगी के सफर को आसान बना रही है नई स्कूटी।
कई रंगों में मिलने वाली ये स्कूटी युवतियों के लिए खास डिजाइन में बनाई गई हैं। याहामा की बात करें तो इसने युवतियों की पसंद के रंग और स्टाइल का ध्यान रखा है। भारत की सड़कों और यातायात को ध्यान में रखकर इसके इंजन को ताकतवर बनाया गया है। वेस्पा का आकार और स्टाइल इसे चलाना और भी आसान बनाता है। सबसे खास बात यह है कि इसके संकेतक और हेडलाइट इतनी बढि़या है कि रात में भी सड़क साफ दिखती है। होंडा एक्टिवा की बात करें तो यह स्कूटर से कहीं बढ़कर हैं। इसे चलाते वक्त थकान नहीं होती।

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