बैगपाइप बैंड सुरीला करियर

बैगपाइप बैंड एक खास तरीके का म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट है, जो रॉयल अहसास कराता है। मेहनत और रियाज से इसे बजाने का हुनर सीखने वालों के लिए इस फील्ड में कई तरह के करियर अवसर हैं..
याद कीजिए, देश की राजधानी नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान राजपथ पर होने वाले उस नजारे को, जिसमें खास यूनिफॉर्म में सजी-धजी सैन्य टुकड़ियां एक विशेष वाद्य यंत्र के साथ धुन निकालते हुए कदमताल करती हैं। लोगों को यह धुन इतनी प्रभावित करती है कि वे तालियों की गड़गड़ाहट से मार्चर्स का स्वागत करते हैं।
सेना के इस खास बैंड को आज के समय में लोग बड़े शान से अपने विशेष आयोजनों में भी आमंत्रित करते हैं। जी हां, बड़े-बड़े थैलों के साथ लगी पाइप में जब रियाज और कड़ी मेहनत के बल पर फूंक कर हवा भरी जाती है, तो निकलती है कुछ खास धुन। हम यहां बात कर रहे हैं इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक के एक खास स्टाइल बैग पाइप की, जो हमारी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। दूसरे देशों में भी यह बेहद लोकप्रिय है। दिलचस्प यह है कि हमारे देश में आज भी लोग बैगपाइप बैंड के साथ अपना करियर संवारने में पीछे नहीं हैं। यही वजह है कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा मिलिट्री बैंड्स भारत में ही हैं और इनके पास सबसे ज्यादा धुनें भी हैं।
क्या है बैगपाइप?
एक बैगपाइप का वजन करीब चार किलोग्राम होता है। इसे चलते-चलते बजाने के लिए कड़े प्रशिक्षण के साथ-साथ बहुत अधिक स्टैमिना की जरूरत होती है। इसलिए पाइपर्स को प्रोटीन युक्त पौष्टिक आहार लेना होता है, ताकि उनमें ताकत की कमी न हो। इसके अलावा, आपको अनुशासित तरीके से पाइप को बजाना होता है। पाइप बैंड में एक बैग पाइपर, एक बगल और एक ड्रम होता है, यानी यह कभी अकेले नहीं बजाया जाता है।
बैगपाइप के फायदे
यह बात वैज्ञानिक रूप से साबित हो चुकी है कि जो लोग नियमित रूप से बैगपाइप बजाते हैं, उनमें फेफड़ों से संबंधित बीमारी की आशंका कम हो जाती है क्योंकि यह वाद्य यंत्र हमारी श्वास प्रणाली के आधार पर ही बजाया जाता है। इसमें धुन तभी निकलती है, जब बैग में हवा भरी हो। एक्सप‌र्ट्स के अनुसार, पांच से दस मिनट तक बैगपाइप बजाना, दो किलोमीटर जॉगिंग करने के बराबर ही है। इसलिए यह शारीरिक रूप से फिट रखने में काफी मदद करता है।
बैगपाइप की ट्रेनिंग
भारत में आज कई संस्थान बैगपाइप बजाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। छह महीने के शॉर्ट-टर्म कोर्स चलाए जा रहे हैं। इस कोर्स को करने के लिए स्टूडेंट्स की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए। अ‌र्द्ध-सैनिक बलों, सेनाओं और उच्च प्रशिक्षित क्षेत्रों से भी फैकल्टी स्टूडेंट्स को प्रशिक्षण देने आती है। इसके अलावा, वहां के स्टूडेंट्स का कैंपस प्लेसमेंट भी हो रहा है।
जॉब प्रॉस्पेक्ट्स
आप बैगपाइप मेजर, ड्रम मेजर, बैंड मास्टर्स व यंग ब्वॉयज कोर्स करने के बाद आर्मी, बीएसएफ, सीआरपीएफ, आइटीबीपी, सीआइएसएफ, राज्य पुलिस, रेलवे पुलिस में करियर बना सकते हैं।
चाहें तो किसी पब्लिक स्कूल में बतौर बैंड टीचर नियुक्त हो सकते हैं। स्वयं का रोजगार भी शुरू कर सकते हैं। शादी-ब्याह जैसे समारोहों में भी यह बैंड खासा पॉपुलर है। इसके अलावा, कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स जैसे इवेंट्स में भी इसे बजाने का पूरा अवसर मिलता है। इससे आपकी एक पहचान बनती है।
बैगपाइप का इतिहास
ब्रिटिशर्स अपने आर्मी बैंड्स में बैगपाइप का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने ही 19वीं शताब्दी में इस यंत्र को भारत में इंट्रोड्यूस किया था। भारतीय सेना में आज जो बैगपाइप बजाए जाते हैं, उसकी स्कॉटिश धुन इसी परंपरा से प्रेरित है। दरअसल, युद्ध के मैदान में सैनिकों का मनोबल ऊंचा रखने में मिलिट्री म्यूजिक की अहम भूमिका होती थी। इसके अलावा, खुशी और गम का माहौल हो या हार और जीत के पल, मिलिट्री बैंड्स सैन्य जीवन में हमेशा से एक विशेष स्थान रखते आए हैं। आज मिलिट्री बैंड्स में ब्रास और पाइप, दो तरह के बैंड्स होते हैं। थल सेना, नौसेना या वायुसेना का कोई भी समारोह बिना बैंड के परफॉर्मेंस के पूरा नहीं होता है। हर साल गणतंत्र दिवस समारोह का समापन इस मिलिट्री बैंड के भव्य प्रदर्शन के बाद ही पूरा होता है। इन दिनों बैंड मास्टर्स मार्शल म्यूजिक, पश्चिमी धुनों के अलावा देशभक्ति के गीत, लोक गीत, जैज, रॉक, क्लासिकल, फिल्मी गीत सभी बड़ी शान से बजाते हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post
SANSKAR NEWS LIVE
SANSKAR NEWS LIVE

🎧 LIVE FM RADIO




🔊 Volume