आर्थिक सुधारों की राह पर चल रहा भारत दुनिया की सर्वाधिक तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। विशाल तथा लगातार बढ़ रही जनसंख्या ने इसे एक उत्तम बाजार के रूप में दुनिया भर में मशहूर किया हुआ है। आगे भी भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास की दर ऐसे ही तेज बनी रहेगी। करीब एक दशक से देश में जिस तेजी से नए अवसर पैदा हुए हैं उसी तेजी से नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। कई क्षेत्रों में विकास के साथ प्रशिक्षित कामगारों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
टॉप सैक्टर्स
आज से नया साल शुरू हो रहा है और यह भी अपने साथ नई अपेक्षाएं तथा सम्भावनाएं लाया है। इस साल भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें सबसे अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। एसोचैम के अनुसार इस साल जो सैक्टर प्रमुख नियोक्ता साबित होंगे उनके बारे में आपको जानकारी दे रहे हैं।
1. इंफोर्मेशन टैक्नोलॉजी
आई.टी. क्षेत्र भारत के सबसे तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में से एक बना हुआ है। कई सालों से इस क्षेत्र ने लगातार विकास किया है। भारत को एक धीमी विकासशील अर्थव्यवस्था से एक वैश्विक खिलाड़ी बनाने में इस क्षेत्र का अभूतपूर्व योगदान रहा है। अनुमान है कि भारतीय आई.टी. इंडस्ट्री साल 2020 तक 225 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।
इस साल अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार होने से भारतीय आई.टी. सैक्टर को विशेष लाभ होगा। भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2020 तक भारतीय आई.टी. सैक्टर में काम करने वालों की संख्या 3 करोड़ हो जाएगी। साथ ही इस क्षेत्र में मिलने वाले पारिश्रमिक में भी अच्छा-खासा इजाफा होगा। आऊटसोर्सिंग इंडस्ट्री भी भारत की तरफ देख रही है जिसके अगले 2 सालों के दौरान 2.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाने की अपेक्षा है।
करियर विकल्प
हार्डवेयर इंजीनियर, सिस्टम्स एनालिस्ट, एप्लीकेशन आॢकटैक्ट, नैटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर, डाटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, प्रोजैक्ट मैनेजर।
2. फार्मास्युटिकल
देश और दुनिया की विशाल आबादी के बीच औषधि यानी फार्मा सैक्टर का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका विस्तार रिसर्च एंड डिवैल्पमैंट से लेकर मैन्यूफैक्चरिंग, क्लीनिकल ट्रायल, जैनेटिक ड्रग्स तक हो चुका है। वैश्विक स्तर पर इसमें भारत की भागीदारी अहम है।
एक अनुमान के मुताबिक इस क्षेत्र में आज तकरीबन 5 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इस क्षेत्र में जिस तेजी से तरक्की हो रही है, उससे आने वाले समय में फर्मा विशेषज्ञ और इससे जुड़े लोगों की मांग और बढ़ेगी।
इस क्षेत्र में आने के लिए 10वीं से ही खुद को दिमागी तौर पर तैयार रखना पड़ता है क्योंकि इसमें 12वीं के अंकों के आधार पर उन्हीं छात्रों को दाखिला दिया जाता है जिन्होंने मैडीकल साइंस से जुड़े विषय की पढ़ाई की हो। छात्रों को न्यूनतम 50 फीसदी अंक के साथ बारहवीं में जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, जूलॉजी आदि विषय पढ़े होने चाहिएं। दाखिला आमतौर पर कट ऑफ के आधार पर दिया जाता है। डिफार्मा और बैचलर इन फार्मा की अलग-अलग दाखिला प्रक्रिया अपनाई जाती है।
करियर विकल्प
दवाओं के वितरण से लेकर मार्कीटिंग, पैकेजिंग और मैनेजमैंट सभी फार्मास्युटिकल के अहम हिस्से हैं। फार्मासिस्ट, मार्कीटिंग मैनेजर से लेकर औषधियों के शोध में भी काम किया जा सकता है।
3. एग्रो बेस्ड इंडस्ट्रीज
हम जानते हैं कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है और आज इसका व्यावसायिक महत्व कई गुणा बढ़ चुका है। लागातार व्यावसायिक परिदृश्य, तकनीकी परिवर्तन, वैश्वीकरण, प्रतिस्पर्धा के कारण कृषि क्षेत्र के सामने भी कई चुनौतियां आ रही हैं। निर्यात बढ़ा है, खेती के साथ कई अन्य व्यवसाय भी जुड़े हैं, यही कारण है कि एग्रो बेस्ड इंडस्ट्री भी तेजी से विकास कर रही है जिसमें ट्रैक्टर एवं फार्म संबंधी उपकरण निर्माता, बीज उत्पादक एवं विक्रेता से लेकर एफ.एम.सी.जी. आदि शामिल हैं। एग्रीकल्चर स्टूडैंट्स के लिए भी यह एक पसंदीदा करियर बन रहा है।
एग्रीकल्चर, हार्टीकल्चर, फॉरैस्ट्री, एलायड साइंस या बायोलॉजिकल साइंस में 60 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रैजुएशन करने वाले छात्र सीधे एग्रीकल्चर से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार हासिल कर सकते हैं। अच्छे संस्थानों में दाखिले के लिए कॉमन एंट्रैंस एग्जाम जैसे कैट या मैट या संबंधित संस्थान के लिए विशेष परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होता है। इन क्षेत्रों में सफलता के लिए कृषि में रुचि के अलावा व्यवसाय की बेहतर समझ होना भी जरूरी होता है।
करियर विकल्प
इस क्षेत्र में काम के कई अवसर हैं। एग्री बिजनैस मैनेजर, मार्कीटिंग मैनेजर, एग्रीकल्चरल लोन ऑफिस, रिसर्च एनालिस्ट, फ्लोर मिल मैनेजर, ग्रेन मर्चेंडाइजर आदि विकल्पों की कमी नहीं है।
4. बैंकिंग
बेशक पिछला साल बैंकिंग सैक्टर के लिए चुनौतियों से भरा रहा परंतु अनुमान लगाया जा रहा है कि नया साल उनके लिए बेहतर साबित होगा। वैसे भी बैंकिंग सैक्टर करियर के लिहाज से हमेशा से सुरक्षित और प्रतिष्ठित माना गया है। आज भारत में बैंकिंग सैक्टर का इतना विस्तार हो गया है कि वाणिज्यिक और सहकारी बैंकों की 6 हजार से अधिक शाखाएं काम कर रही हैं। साथ ही सरकारी और निजी बैंक अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं। आप्रेशनल, सेलिंग, मैनेजेरियल, आई.टी. जैसे तमाम क्षेत्रों से जुड़े पेशेवर अपनी योग्यता और रुझान के अनुसार इस क्षेत्र में करियर का चुनाव कर सकते हैं, बशर्ते उनका गणित या फिर कैलकुलेशन पॉवर अच्छी हो।
बैंक की कार्य प्रणाली के बारे में जानने की इच्छा, टीम की तरह काम करने की योग्यता आदि भी उसमें होनी चाहिए। मौखिक और लिखित दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ के साथ-साथ कम्प्यूटर का अच्छा ज्ञान होना जरूरी है। बैंकिंग में नए-नए क्षेत्र जुड़ते जा रहे हैं जिनमें सरल क्रैडिट, कार्पोरेट क्रैडिट, प्रोजैक्ट फाइनांस, कंज्यूमर क्रैडिट, कस्टमर रिलेशनशिप, रूरल बैंकिंग आदि प्रमुख हैं। सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंक इस साल बड़े पैमाने पर नियुक्तियां करेंगे। भारत के करीब 19 पब्लिक सैक्टर बैंक मिलकर एक कॉमन रिटन एग्जाम (सी.डब्ल्यू.ई.) के जरिए नियुक्तियां करते हैं।
बैंक की नौकरी की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए किसी विषय विशेष की बाध्यता नहीं है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों की आवश्यकता पूरी करने के लिए सर्टीफिकेट, डिप्लोमा और पी.जी. डिप्लोमा जैसे कुछ प्रोफैशनल कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। ये कोर्स प्राइवेट बैंकों में करियर की राह तो आसान करते ही हैं, सरकारी बैंकों में भी पी.ओ., क्लर्क, आर.बी.आई. ऑफिसर्स की तैयारी कर रहे स्टूडैंट्स को भी बैंकिंग की जानकारी कराते हैं।
करियर विकल्प
बैंक लिपिक, प्रोबेशनरी ऑफिसर, आई.टी. ऑफिसर, राजभाषा अधिकारी, कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव के अलावा विधि अधिकारी, कार्पोरेट कम्युनिकेटर, क्रैडिट अधिकारी, चार्टर्ड अकाऊंटैंट, कम्पनी सचिव, स्टैटिस्टिशियन, एच.आर., सामान्य प्रबंधक, मार्कीटिंग मैनेजर, सम्पर्क अधिकारी, कृषि अधिकारी, सुरक्षा अधिकारी, फाइनांशियल मैनेजर, बैंक टैलर्स, बिल एंड अकाऊंट कलैक्टर्स, लोन ऑफिसर्स आदि।
5. पावर
भारतीय पावर सैक्टर भी लगातार विकास की राह पर अग्रसर है। आने वाले समय में भी इस क्षेत्र में इसी तेजी से विकास होते रहने की पूरी संभावना है जिससे यहां रोजगार के मौकों में भी काफी इजाफा होगा। हाल के समय में इस सैक्टर ने अच्छा और बुरा दोनों तरह का समय देखा है परंतु आने वाले समय में इसमें तरक्की होने की पूरी सम्भावनाएं देखी जा रही हैं।
हरियाणा, पंजाब, गुजरात, तथा बिहार जैसे राज्यों में पावर सैक्टर में बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है और किए जाने की योजना है जबकि अन्य राज्य भी उनकी तरह ही ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। पावर सैक्टर की बड़ी कम्पनियों के काम में विस्तार के अलावा कुछ अन्य कम्पनियों के भी यहां प्रवेश करने से इस सैक्टर में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
करियर विकल्प
पावर जैनरेशन से लेकर डिस्ट्रिब्यूशन, मैनेजमैंट, डिजाइनिंग तक अनेक फील्ड्स में रोजगार के मौके हैं जिनमें पावर मैनेजमैंट, बॉइलर डिजाइनिंग, पावर प्लांट डिजाइन, स्टीम टर्बाइन डिजाइन, प्वार प्लांट साइकिल एनालिसिस, सोलर एनर्जी एवं बायोमास प्लांट डिजाइनिंग एवं मैनेजमैंट आदि प्रमुख हैं।
2014 में साढ़े आठ लाख नई नौकरियां
एक अनुमान के अनुसार इस साल विभिन्न क्षेत्रों में करीब साढ़े 8 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। यह गत वर्ष 7.9 लाख नौकरियों से अधिक है। यह अनुमान देश के 12 इंडस्ट्री सैक्टर्स की 5600 फम्र्स के अध्ययन पर आधारित है। गौरतलब है कि नई नौकारियों का यह अनुमान केवल संगठित क्षेत्र के लिए है यानी कि गैर-संगठित क्षेत्र में पैदा होने वाले रोजगार के अवसर इसमें शामिल नहीं हैं।
इस अध्ययन के अनुसार इस साल सबसे अधिक करीब डेढ़ लाख नौकरियों के मौके एफ.एम.सी.जी. (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) में पैदा होंगे। इसके बाद हैल्थकेयर सैक्टर में 1.33 लाख, आई.टी. तथा आई.टीई.एस. में 1.21 लाख, रिटेल में 86700 और होस्पिटैलिटी में 83400 नई नौकरियां पैदा होंगी।
इसके अलावा बैंकिंग एवं फाइनांशियल सर्विसेज सैक्टर में 61400, मैन्यूफैक्चरिंग एवं इंजीनियरिंग में 51500, एजुकेशन, ट्रेनिंग एवं कंसल्टैंसी में 42900, मीडिया एवं एंटरटेनमैंट में 42800 और रियल एस्टेट में 38,700 नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान लगाया गया है।
टॉप सैक्टर्स
आज से नया साल शुरू हो रहा है और यह भी अपने साथ नई अपेक्षाएं तथा सम्भावनाएं लाया है। इस साल भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें सबसे अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। एसोचैम के अनुसार इस साल जो सैक्टर प्रमुख नियोक्ता साबित होंगे उनके बारे में आपको जानकारी दे रहे हैं।
1. इंफोर्मेशन टैक्नोलॉजी
आई.टी. क्षेत्र भारत के सबसे तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में से एक बना हुआ है। कई सालों से इस क्षेत्र ने लगातार विकास किया है। भारत को एक धीमी विकासशील अर्थव्यवस्था से एक वैश्विक खिलाड़ी बनाने में इस क्षेत्र का अभूतपूर्व योगदान रहा है। अनुमान है कि भारतीय आई.टी. इंडस्ट्री साल 2020 तक 225 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।
इस साल अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार होने से भारतीय आई.टी. सैक्टर को विशेष लाभ होगा। भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2020 तक भारतीय आई.टी. सैक्टर में काम करने वालों की संख्या 3 करोड़ हो जाएगी। साथ ही इस क्षेत्र में मिलने वाले पारिश्रमिक में भी अच्छा-खासा इजाफा होगा। आऊटसोर्सिंग इंडस्ट्री भी भारत की तरफ देख रही है जिसके अगले 2 सालों के दौरान 2.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाने की अपेक्षा है।
करियर विकल्प
हार्डवेयर इंजीनियर, सिस्टम्स एनालिस्ट, एप्लीकेशन आॢकटैक्ट, नैटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर, डाटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, प्रोजैक्ट मैनेजर।
2. फार्मास्युटिकल
देश और दुनिया की विशाल आबादी के बीच औषधि यानी फार्मा सैक्टर का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका विस्तार रिसर्च एंड डिवैल्पमैंट से लेकर मैन्यूफैक्चरिंग, क्लीनिकल ट्रायल, जैनेटिक ड्रग्स तक हो चुका है। वैश्विक स्तर पर इसमें भारत की भागीदारी अहम है।
एक अनुमान के मुताबिक इस क्षेत्र में आज तकरीबन 5 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इस क्षेत्र में जिस तेजी से तरक्की हो रही है, उससे आने वाले समय में फर्मा विशेषज्ञ और इससे जुड़े लोगों की मांग और बढ़ेगी।
इस क्षेत्र में आने के लिए 10वीं से ही खुद को दिमागी तौर पर तैयार रखना पड़ता है क्योंकि इसमें 12वीं के अंकों के आधार पर उन्हीं छात्रों को दाखिला दिया जाता है जिन्होंने मैडीकल साइंस से जुड़े विषय की पढ़ाई की हो। छात्रों को न्यूनतम 50 फीसदी अंक के साथ बारहवीं में जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, जूलॉजी आदि विषय पढ़े होने चाहिएं। दाखिला आमतौर पर कट ऑफ के आधार पर दिया जाता है। डिफार्मा और बैचलर इन फार्मा की अलग-अलग दाखिला प्रक्रिया अपनाई जाती है।
करियर विकल्प
दवाओं के वितरण से लेकर मार्कीटिंग, पैकेजिंग और मैनेजमैंट सभी फार्मास्युटिकल के अहम हिस्से हैं। फार्मासिस्ट, मार्कीटिंग मैनेजर से लेकर औषधियों के शोध में भी काम किया जा सकता है।
3. एग्रो बेस्ड इंडस्ट्रीज
हम जानते हैं कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है और आज इसका व्यावसायिक महत्व कई गुणा बढ़ चुका है। लागातार व्यावसायिक परिदृश्य, तकनीकी परिवर्तन, वैश्वीकरण, प्रतिस्पर्धा के कारण कृषि क्षेत्र के सामने भी कई चुनौतियां आ रही हैं। निर्यात बढ़ा है, खेती के साथ कई अन्य व्यवसाय भी जुड़े हैं, यही कारण है कि एग्रो बेस्ड इंडस्ट्री भी तेजी से विकास कर रही है जिसमें ट्रैक्टर एवं फार्म संबंधी उपकरण निर्माता, बीज उत्पादक एवं विक्रेता से लेकर एफ.एम.सी.जी. आदि शामिल हैं। एग्रीकल्चर स्टूडैंट्स के लिए भी यह एक पसंदीदा करियर बन रहा है।
एग्रीकल्चर, हार्टीकल्चर, फॉरैस्ट्री, एलायड साइंस या बायोलॉजिकल साइंस में 60 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रैजुएशन करने वाले छात्र सीधे एग्रीकल्चर से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार हासिल कर सकते हैं। अच्छे संस्थानों में दाखिले के लिए कॉमन एंट्रैंस एग्जाम जैसे कैट या मैट या संबंधित संस्थान के लिए विशेष परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होता है। इन क्षेत्रों में सफलता के लिए कृषि में रुचि के अलावा व्यवसाय की बेहतर समझ होना भी जरूरी होता है।
करियर विकल्प
इस क्षेत्र में काम के कई अवसर हैं। एग्री बिजनैस मैनेजर, मार्कीटिंग मैनेजर, एग्रीकल्चरल लोन ऑफिस, रिसर्च एनालिस्ट, फ्लोर मिल मैनेजर, ग्रेन मर्चेंडाइजर आदि विकल्पों की कमी नहीं है।
4. बैंकिंग
बेशक पिछला साल बैंकिंग सैक्टर के लिए चुनौतियों से भरा रहा परंतु अनुमान लगाया जा रहा है कि नया साल उनके लिए बेहतर साबित होगा। वैसे भी बैंकिंग सैक्टर करियर के लिहाज से हमेशा से सुरक्षित और प्रतिष्ठित माना गया है। आज भारत में बैंकिंग सैक्टर का इतना विस्तार हो गया है कि वाणिज्यिक और सहकारी बैंकों की 6 हजार से अधिक शाखाएं काम कर रही हैं। साथ ही सरकारी और निजी बैंक अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं। आप्रेशनल, सेलिंग, मैनेजेरियल, आई.टी. जैसे तमाम क्षेत्रों से जुड़े पेशेवर अपनी योग्यता और रुझान के अनुसार इस क्षेत्र में करियर का चुनाव कर सकते हैं, बशर्ते उनका गणित या फिर कैलकुलेशन पॉवर अच्छी हो।
बैंक की कार्य प्रणाली के बारे में जानने की इच्छा, टीम की तरह काम करने की योग्यता आदि भी उसमें होनी चाहिए। मौखिक और लिखित दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ के साथ-साथ कम्प्यूटर का अच्छा ज्ञान होना जरूरी है। बैंकिंग में नए-नए क्षेत्र जुड़ते जा रहे हैं जिनमें सरल क्रैडिट, कार्पोरेट क्रैडिट, प्रोजैक्ट फाइनांस, कंज्यूमर क्रैडिट, कस्टमर रिलेशनशिप, रूरल बैंकिंग आदि प्रमुख हैं। सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंक इस साल बड़े पैमाने पर नियुक्तियां करेंगे। भारत के करीब 19 पब्लिक सैक्टर बैंक मिलकर एक कॉमन रिटन एग्जाम (सी.डब्ल्यू.ई.) के जरिए नियुक्तियां करते हैं।
बैंक की नौकरी की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए किसी विषय विशेष की बाध्यता नहीं है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों की आवश्यकता पूरी करने के लिए सर्टीफिकेट, डिप्लोमा और पी.जी. डिप्लोमा जैसे कुछ प्रोफैशनल कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। ये कोर्स प्राइवेट बैंकों में करियर की राह तो आसान करते ही हैं, सरकारी बैंकों में भी पी.ओ., क्लर्क, आर.बी.आई. ऑफिसर्स की तैयारी कर रहे स्टूडैंट्स को भी बैंकिंग की जानकारी कराते हैं।
करियर विकल्प
बैंक लिपिक, प्रोबेशनरी ऑफिसर, आई.टी. ऑफिसर, राजभाषा अधिकारी, कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव के अलावा विधि अधिकारी, कार्पोरेट कम्युनिकेटर, क्रैडिट अधिकारी, चार्टर्ड अकाऊंटैंट, कम्पनी सचिव, स्टैटिस्टिशियन, एच.आर., सामान्य प्रबंधक, मार्कीटिंग मैनेजर, सम्पर्क अधिकारी, कृषि अधिकारी, सुरक्षा अधिकारी, फाइनांशियल मैनेजर, बैंक टैलर्स, बिल एंड अकाऊंट कलैक्टर्स, लोन ऑफिसर्स आदि।
5. पावर
भारतीय पावर सैक्टर भी लगातार विकास की राह पर अग्रसर है। आने वाले समय में भी इस क्षेत्र में इसी तेजी से विकास होते रहने की पूरी संभावना है जिससे यहां रोजगार के मौकों में भी काफी इजाफा होगा। हाल के समय में इस सैक्टर ने अच्छा और बुरा दोनों तरह का समय देखा है परंतु आने वाले समय में इसमें तरक्की होने की पूरी सम्भावनाएं देखी जा रही हैं।
हरियाणा, पंजाब, गुजरात, तथा बिहार जैसे राज्यों में पावर सैक्टर में बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है और किए जाने की योजना है जबकि अन्य राज्य भी उनकी तरह ही ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। पावर सैक्टर की बड़ी कम्पनियों के काम में विस्तार के अलावा कुछ अन्य कम्पनियों के भी यहां प्रवेश करने से इस सैक्टर में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
करियर विकल्प
पावर जैनरेशन से लेकर डिस्ट्रिब्यूशन, मैनेजमैंट, डिजाइनिंग तक अनेक फील्ड्स में रोजगार के मौके हैं जिनमें पावर मैनेजमैंट, बॉइलर डिजाइनिंग, पावर प्लांट डिजाइन, स्टीम टर्बाइन डिजाइन, प्वार प्लांट साइकिल एनालिसिस, सोलर एनर्जी एवं बायोमास प्लांट डिजाइनिंग एवं मैनेजमैंट आदि प्रमुख हैं।
2014 में साढ़े आठ लाख नई नौकरियां
एक अनुमान के अनुसार इस साल विभिन्न क्षेत्रों में करीब साढ़े 8 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। यह गत वर्ष 7.9 लाख नौकरियों से अधिक है। यह अनुमान देश के 12 इंडस्ट्री सैक्टर्स की 5600 फम्र्स के अध्ययन पर आधारित है। गौरतलब है कि नई नौकारियों का यह अनुमान केवल संगठित क्षेत्र के लिए है यानी कि गैर-संगठित क्षेत्र में पैदा होने वाले रोजगार के अवसर इसमें शामिल नहीं हैं।
इस अध्ययन के अनुसार इस साल सबसे अधिक करीब डेढ़ लाख नौकरियों के मौके एफ.एम.सी.जी. (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) में पैदा होंगे। इसके बाद हैल्थकेयर सैक्टर में 1.33 लाख, आई.टी. तथा आई.टीई.एस. में 1.21 लाख, रिटेल में 86700 और होस्पिटैलिटी में 83400 नई नौकरियां पैदा होंगी।
इसके अलावा बैंकिंग एवं फाइनांशियल सर्विसेज सैक्टर में 61400, मैन्यूफैक्चरिंग एवं इंजीनियरिंग में 51500, एजुकेशन, ट्रेनिंग एवं कंसल्टैंसी में 42900, मीडिया एवं एंटरटेनमैंट में 42800 और रियल एस्टेट में 38,700 नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान लगाया गया है।
